Thursday, 9 January 2014

पत्रकार या नेता?

नेता और पत्रकार का रिश्ता। राजनीति और पत्रकारिता का रिश्ता। जैसे फेवीकोल का मज़बूत जोड़। आसानी से टूटने वाला नहीं। 

स्वतंत्रता के आंदोलन में अख़बार निकालने वाले महापुरुष स्वाभाविक रूप से समाज में सक्रिय हुए और राजनीतिक दलों के साथ जुड़ कर देश सेवा करते रहे। आज़ादी के कुछ साल बाद तक राजनीति देश निर्माण का माध्यम रही और बड़े पत्रकार भी इससे जुड़ते रहे। 

लेकिन धीरे-धीरे समाज के साथ-साथ राजनीति में तमाम बुराइयाँ आती गईं और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं रही। अब राजनीति व्यवसाय है और पत्रकारिता भी। पत्रकार अब भी राजनीति में आ रहे हैं। और आगे भी आते रहेंगे।