Tuesday, 4 November 2014

अमेरिका डायरी -1 सीखने की 5 बातें

अमेरिका की अपनी संक्षिप्त यात्रा में मुझे कई बातें सीखने को मिलीं। ऐसी बातें जो हम अमेरिका और वहां के लोगों से सीख सकते हैं।

 
1. सफ़ाई- मुझे लगता है ये सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई देशों को छोड़ पूरी दुनिया में देखने को मिलती है। वॉशिंगटन में मैं नेशनल मॉल पर घूम रहा था। थोड़ी दूर पर देखा कि एक व्यक्ति सड़क पर झुक कर किसी दूसरे व्यक्ति का अनजाने में हाथों से गिर गया बेकार कागज उठा रहा है। उसने इसे उठाया और इसे लेकर थोड़ी दूर चलता रहा। आगे डस्टबिन मिलने पर उसे डाल कर निकल गया। ये घटना बताती है कि स्वच्छता किस तरह से वहां के लोगों की सोच में बसी है।

 
2. कार पूल- अमेरिका में बसे मेरे मित्र प्रतीक ने मुझे वॉशिंगटन में अपने होटल से अपने साथ कार में लिया। ये इलाका बड़े सरकारी कार्यालयों का है। थोड़ी दूर आगे चलने पर सड़क के किनारे पंक्तिबद्ध लोगों को देखा। पूछने पर प्रतीक ने बताया कि ऐसी कार जिनमें ड्राइवर के अलावा कोई और नहीं है, वे इन लोगों को अपने साथ बिठा सकते हैं। हाई वे पर एक लेन सिर्फ उन कारों के लिए है जिनमें एक से अधिक व्यक्ति बैठे हों। इसे एचओवी यानी हाई आक्यूपेंसी व्हीकल लेन कहा जाता है। पीक आवर्स में जहां दूसरी लेन पर कारों की संख्या अधिक होने से भीड़ रहती है और समय खराब होता है, एचओवी का इस्तेमाल करने वाले फर्राटे से निकल सकते हैं। ईंधन, प्रदूषण, समय सब बचाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए अमेरिकी सरकार की ओर से उठाया गया ये कदम है।

 
3. अमेरिकी झंडा- ये आपको हर जगह दिखेगा। सिर्फ सरकारी इमारतों के बाहर ही नहीं। बसों, कारों, साइकलों, घरों यहां तक कि लोगों की टोपियों के ऊपर भी एक छोटा अमेरिकी झंडा दिख जाता है। पूछने पर एक अमेरिकी ने बताया कि बहुत लंबी लड़ाई के बाद आज़ादी मिली। ये उसी की पहचान है। ये एहसास होता रहता है कि आजादी बहुत कीमती है, देश सबसे पहले है इसीलिए हर जगह झंडा लगाने का भाव अंदर से आता है। न्यूयॉर्क के सैंट्रल पार्क में मैंने देखा कि एक छोटा सा अमेरिकी झंडा जमीन पर गिरा हुआ था। एक व्यक्ति आया। उसने उसे उठा कर हाथों से साफ किया। अपनी टोपी पर लगाया और चल दिया।

 
4. स्कूली शिक्षा- प्रतीक ने बताया कि उनकी बेटियां प्रथा और प्रिशा नजदीक के स्कूलों में पढ़ती हैं। साप्ताहिक अवकाश में होम वर्क नहीं होता। सरकारी स्कूलों में कोई फीस नहीं है। स्कूल चाहे घऱ के पास हो मगर बीच में एक व्यस्त सड़क होने के कारण प्रथा के लिए घर पर ही स्कूल बस आती है। बड़ी कक्षाओं में अधिकतर पढ़ाई कंप्यूटर से है। बच्चों पर पढ़ाई का या फिर उम्मीदों का बोझ नहीं डाला जाता। बच्चों के लिए खेलने का पर्याप्त समय है। स्कूल में अंग्रेजी में पढ़ाई तो घर पर हिंदी या गुजराती बोलने का पूरा अवसर। आप कल्पना कर सकते हैं जिन बच्चों को शुरु से ही तीन-तीन भाषाओं में पारंगत होने का मौका मिलें, आगे जाकर उनका मानसिक विकास और ज्ञान अन्य बच्चों की तुलना में स्वाभाविक रूप से अधिक होगा।


5. होम लोन- अमेरिका में होम लोन पर ब्याज दर अधिकतम चार फीसदी के करीब है और वो भी तीस साल के लोन पर। दस साल के लिए मकान पर कर्ज तीन फीसदी तक मिल सकता है। पूछने पर पता चला कि लीमैन ब्रदर्स संकट के चलते अमेरिकी अर्थव्यवस्था लड़खड़ाने से पहले तो होम लोन पर ब्याज दर न के बराबर थी। इसी संकट से सबक लेते हुए ब्याज दरों में इजाफा हुआ मगर अब भी पहुंच के भीतर ही है। सबके सिर पर छत वहां भी नहीं है। मगर जिसकी क्षमता हो, उसे इन कम ब्याज दरों से अपना घर लेने में मदद जरूर मिलती है।