Wednesday, 1 January 2014

प्रकाश स्तंभ है हमारा संविधान

डॉक्टर बी आर अंबेडकर, संविधान के वास्तुकार


भारत के संविधान के 65 साल पूरे होने जा रहे हैं। इन वर्षों में भारत की सबसे बड़ी कामयाबी यही रही है कि इस संविधान के चलते उसने स्वयं को प्रजातांत्रिक मुल्क बना कर रखा है। आखिर क्या है इस संविधान की खास बातें।

 प्रजातंत्र अगर भारत का धर्म है तो संविधान उसका ग्रंथ। ये भारत के सारे नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है। जाति, वर्ग, धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं हो सकता। हर व्यक्ति को मौलिक अधिकार हासिल हैं। 

सबको सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, अपनी बात रखने का अधिकार, धर्म और उपासना की आज़ादी और प्रतिष्ठा और अवसर में समानता। यानी सब बराबर और समान।

पिछले साठ साल में भारत में प्रजातंत्र ने कई उतार-चढ़ाव देखे. लेकिन भारत अगर मज़ूबत प्रजातांत्रिक देश बना रहा है तो उसके पीछे हमारा लिखित संविधान ही है।

इस संविधान के तीन प्रमुख खंभे हैं- 
1. विधायिका. यानी संसद और विधानसभाएं। इनका काम है कानून बनाना। ये ज़रूरत पड़ने पर संविधान में संशोधन भी कर सकती हैं।
2.   न्यायपालिका यानी अदालतें। ये कानून के अनुसार न्याय करती हैं। मौलिक अधिकारों की रक्षा का काम इनके हवाले है।
3. कार्यपालिका यानी नौकरशाही। ये सरकारी अफसर जो कद, ओहदों और ज़िम्मेदारियों में अलग-अलग होते हैं, संविधान के मुताबिक सरकार चलाते हैं।

कहने को मीडिया को चौथा खंभा कहा जाता है। लेकिन संविधान में उसे अलग से अधिकार हासिल नहीं है। सिर्फ़ बोलने और विचारों की आजादी से ही मीडिया की आजादी को जोड़ा जाता है।

हमारे संविधान की कई खासियतें हैं जैसे

-हर व्यक्ति को वोट देने का अधिकार है।
- उसे संसदीय प्रणाली के तहत अपनी पसंद के नुमाइंदे और सरकार को चुनने की आज़ादी है।
- संघीय ढांचा देश की एकता और अखंडता की गारंटी देता है।
- केंद्र और राज्यों के रिश्तों को साफ़ कर दोनों को साथ-साथ बढ़ने के अधिकार दिए गए हैं।
-अदालतें आज़ाद हैं।
-राजा-महाराजाओं का नहीं, कानून का राज होगा।
-भारत मज़हबी मुल्क नहीं बल्कि पंथनिरपेक्ष रहेगा।
  
पिछले साठ साल में इस संविधान में कई बार बदलाव किए गए हैं।

- संविधान में संशोधन का अधिकार भी संविधान ने ही दिया है।
- अब तक 95 संशोधन हो चुके हैं।
- संविधान को लागू करने के एक साल के भीतर ही यानी 1951 में पहली बार संशोधन किया गया।
- बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे साफ करते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे से छेड़-छाड़ किए बगैर संशोधन किया जाना चाहिए।
- बार-बार संविधान में संशोधन से तंग आकर दस साल पहले संविधान समीक्षा आयोग ही बना दिया गया था लेकिन उसकी सिफारिशें लागू नहीं की जा सकी हैं।

भारत आज विकसित देश होने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। हालांकि, आज भी गरीबी, अशिक्षा, असमानता, सांप्रदायिकता, क्षेत्रवाद, जंगलराज जैसी समस्यायें हैं। फिर भी, बहुत लोगों को लगता है कि इस अंधेरे से निकलने में हमारा संविधान लाइट हाऊस की तरह दिशा दिखाने का काम करता रहेगा।