Wednesday, 7 April 2010

बुढ़ापा

बाल पक जाएंगे.
दाँत गिर जाएंगे.
पोपले मुंह से निकलेंगी हिसहिसाती आवाज़ें
जिनका मतलब जिसकी जो समझ में आए लगा ले.
'पापा आप बूढ़े हो जाओगे तब मेरे क्या होगे.
क्या तब भी आप मेरे पापा ही रहोगे.'
बचपन के इन सवालों पर जवानी में आती है हँसी
लेकिन सामने खड़ा बुढ़ापा दिखाता है कई हकीकतें.
डरावनी शक्लें लिए खड़ा होता है सामने भविष्य.
इसके डर से आज भी हैरान परेशान है.
कहता है तू कल की क्यों सोचता है.
मैं आज हूं मुझे जी भर के जी ले.

फिर अखबार के पन्नों पर दिखते हैं विज्ञापन.
अपने बुढ़ापे को सुरक्षित करने के लिए अपनाएं पेंशन प्लान.
या विशेषज्ञों के वो लेख जो कहते हैं आपको बुढ़ापे में चाहिए होंगे 10 करोड़ रुपए.
ताकि संतानों की पढ़ाई का खर्चा उठा सकें और अपना बुढ़ापा खुशी-खुशी बिता सकें..
बुढापे के सुखी जीवन की चिंता में आज जवानी में हो रहे हैं बाल सफेद.
जवानी के दिन दुख में बिताओ ताकि बुढ़ापे में सुख चैन से जी सको.
ऐसे ही एक दिन धीमे कदमों से बुढ़ापा दे देगा दस्तक.
क्या बुढ़ापा रोकने का भी है कोई पेंशन प्लान. कोई एसआईपी. जो सलवटों को मिटा दे और दे सुकून आज को जीने का....